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जग्गी मर्डर केसः पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, मिली है आजीवन कारावास की सजा

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Apr 08, 2026 09:41 am IST,  Updated : Apr 08, 2026 09:46 am IST

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक नेता की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। अमित जोगी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी - India TV Hindi
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी। फाइल Image Source : ANI

रायपुरः छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना भी लगाया है। हाई कोर्ट के इस फैसले को अमित ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

23 साल बाद आए इस फैसले का सतीश जग्गी ने स्वागत किया है। वहीं अमित जोगी ने कहा मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। अब मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोर्ट के इस फैसले को स्वागत योग्य बताया है। वहीं पीसीसी चीफ दीपक बैज इसे कोर्ट का मामला बताकर पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दिए। 

क्या है मामला

4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, बाद में 3 सरकारी गवाह बन गए थे। कोर्ट ने इस मामले में अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सुनाई सजा थी। 31 मई 2007 को निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बाद रामवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट भेज दिया था। मामले की सुनवाई के बाद अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा है कि जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने अतिरिक्त सजा होगी।

रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह फैसला बताता है कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं। 23 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने साफ किया कि जब सबूत एक जैसे हों तो सजा भी एक जैसी ही होनी चाहिए। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां सरकार इसे सही ठहरा रही है, वहीं अमित जोगी इसे अपने खिलाफ अन्याय बताकर अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय और राहत की उम्मीद कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह मामला अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. जिसका असर छत्तीसगढ़ की राजनीति और जोगी परिवार के भविष्य दोनों पर पड़ेगा।

रिपोर्ट- सिकंदर खान 

 

 

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